कोर्ट ने चार साल बाद जानलेवा आरोपियों को दोषी मानते हुए सुनाई सजा

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बाड़मेर

अपर सेशन न्यायाधीश संख्या-2 सुरेन्द्र खरे द्वारा अभियुक्त हेमाराम पुत्र मगाराम, पुरखाराम पुत्र भींयाराम जाति जाट निवासी अभोनिया का सरा, चवा, नंदराम पुत्र मोटाराम, लछाराम उर्फ़ लक्ष्मण पुत्र अणदाराम जाति जाट  निवासी मगने की ढाणी, कुडला पुलिस थाना सदर जिला बाड़मेर को अपराध अंतर्गत धारा  307/34, 325/34,323, 341 , व् 323 भा.द.स के तहत दोषी मानते हुए अपराध अंतर्गत धारा 307/34 मे 7 वर्ष का कारावास व् 2000 रूपये अर्थदंड व् अपराध अंतर्गत धारा 325/34,  में 3 वर्ष के कारावास व् 2000 रूपये तथा अपराध अंतर्गत धारा 323  में 6 माह के कारावास व् 1000 रूपये के अर्थदंड व अपराध अंतर्गत धारा 341 भा.द.स के तहत दोषी मानते हुए 1 माह के कारावास की सजा सुनाई जो सभी सजाये एक साथ चलेगी !

अपर लोक अभियोजक संख्या– 2 सुरेश मोदी ने बताया कि परिवादी मोहनलाल ने 25 अगस्त 2014 को एक लिखित रिपोर्ट इस आशय की पेश की कि कल शाम 9 बजे उसका भाई चिम्माराम दूकान से मोटरसाईकिल से घर जा रहा था रास्ते में धूणों की ढाणी के पास उसके भाई को जान से मारने की नियत से सुनियोजित योजना बनाकर 3 मोटर साईकिले बिना नम्बर की खड़ी थी जिसपर मेरे भाई को आता देखकर पुरखाराम हेमाराम वगेरह 3-4 अन्य व्यक्तियों ने अपनी मोटर साइकिले आड़ी खडी की थी ! जिसपर मेरे भाई ने अपनी मोटरसाईकिल धीमी की तो सभी मुल्जिमान ने मेरे भाई पर लाठियों व धारदार हथियारो से जानलेवा हमला कर दिया ! मुल्जिम हेमाराम ने उसके भाई के सर पर मारी जिससे वो निचे गिर गया शेष मुल्जिमान ने धडाधड लाठियों व धारदार हथियारों से हमला कर चौटे पहुंचाई जिस से उसकी खोपड़ी फूट गयी हाथ पैरो पर चौंटे आई और बेहोस हो गया इतने में वो और चन्द्र प्रकाश मोटर साइकिल से गाँव जा रहे थे ने देखा तो जाकर बीच बचाव कर छुडवाया तब मुल्जिमान ने कहा कि यह तो मर गया अबके मोहन तेरी बारी है !

मुल्जिमान मोटर साइकिल लेकर चले गये फिर मेरे भाई चिम्माराम को बेहोसी की हालत में अस्पताल लाये ! जिस पर पुलिस थाना बायतु द्वारा मुकदमा संख्या 83/2014 दर्ज कर अनुसंधान प्रारम्भ किया गया और कड़ीबद्ध साक्ष्य संकलित कर अभियुक्तगण हेमाराम पुत्र मगाराम, पुरखाराम पुत्र भींयाराम जाति जाट निवासी अभोनिया का सरा, चवा, नंदराम पुत्र मोटाराम, लछाराम  पुत्र अणदाराम जाती जाट निवासी मगने की ढाणी, कुडला को गिरफ्तार कर उनके विरुद्ध अपराध प्रमाणित मान आरोप पत्र अंतर्गत धारा 323, 341, 325, 307 भा.द.स. के तहत माननीय न्यायालय में प्रस्तुत किया जहां पर अभियोजन पक्ष की ओर से प्रभावी तरीके से समस्त 17 साक्षीगण को परीक्षित करवाया व् संकलित साक्ष्य व् 22 दस्तावेजो को प्रदर्शित करवाया गया एवम दोनों पक्षों की बहस सुनने के पश्चात् अपर सेशन न्यायाधीश संख्या- 2 सुरेन्द्र खरे द्वारा घटना में अभियुक्त हेमाराम, पुरखाराम, नंदराम, लछाराम को हत्या का प्रयास एवं मारपीट करने के अपराध अंतर्गत धारा 307/34, 325/34, 323, 341  भा.द.स के तहत दोषी मानते हुए सजा सुनाई गयी !

उक्त प्रकरण में अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक सुरेश मोदी द्वारा पेरवी की गयी ! अभियुक्तगण की ओर से अधिवक्ता चैनाराम सारण द्वारा पैरवी की गयी ! परिवादी पक्ष की और से करनाराम चौधरी ने पैरवी की !

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