बाड़मेर शहीद स्मारक पर असामाजिक तत्वों ने की तोड़ फोड़

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बाड़मेर

राजस्थान के बाड़मेर जिला मुख्यालय के शहीद सर्किल पर बने अमर जवान शहीद स्मारक को शनिवार रात्रि को रात्रि को असामाजिक तत्वों ने तोड़ दिया। गंभीर तथ्य यह है कि शहीद स्मारक के ठीक ऊपर लगे सीसीटीवी कैमरे लगे होने के बावजूद घटना का कोई वीडियो फुटेज पुलिस को हासिल नही हो पाया क्योंकि सीसीटीवी बीते लम्बे अर्से से बन्द है शहर में शहीदों की शहादत को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। ऐसी घटना पहली बार हुई है .

सीसीटीवी कैमरे बंद 

मामले में सबसे गंभीर तथ्य यह है कि शहीद स्मारक के ठीक ऊपर लगे सीसीटीवी कैमरे लगे होने के बावजूद घटना का कोई वीडियो फुटेज पुलिस को हासिल नही हो पाया क्योंकि सीसीटीवी बीते लम्बे अर्से से बन्द है जिसकी जानकारी पुलिस तक को नही थी।पश्चिमी राजस्थान के बाड़मेर में रविवार को उदय हुआ सूर्य हर देशभक्त को शर्मशार करता नजर आया।

चंद असामाजिक तत्वों ने शनिवार की रात के अंधेरे में वह कर दिया जिसको लेकर हर आम आदमी का सर शर्म से झुक गया। बाड़मेर के एक मात्र अमर जवान शहीद स्मारक को समाज कंटको ने तोड़ दिया। शराब की मदहोशी में या फिर किसी और वजह से रात के अंधेरे में हुए कृत्य ने बाड़मेर पुलिस की कौताही और अँधेरगर्दी पर हकीकत की रोशनी डाल दी।

पुलिस सुरक्षा पर सवाल 

शहर में पुलिस की सुरक्षा पर सवाल लगाना तो वाजिब है क्यों की चन्द मीटर दुरी पर पुलिस चोकी है और पुलिस रात को सर्किल पर गस्त पर सवाल उठाने लग गए . और मामले में सबसे गम्भीर बात यह है कि अमर जवान शहीद स्मारक के ठीक ऊपर सीसीटीवी कैमरा लगा है लेकिन घटना का कोई वीडियो फुटेज रिकॉर्ड नही हुआ जिसकी वजह कैमरे के काफी वक्त से खराब होना बताया जा रहा है। घटना की जानकारी मिलने पर आनन फानन में बाड़मेर व्रताधिकारी रतनलाल की अगुवाई में पुलिस जाब्ता घटनास्थल पहुँचा लेकिन उन्हें सीसीटीवी के बन्द होने से खाली हाथ लौटना पड़ा।

मामले के सबसे गम्भीर पहलू यह है कि घटना होने पर पुलिस को पता चला सीसीटीवी बन्द है जबकि सीसीटीवी का नियंत्रण और मोनिटरिंग पुलिस कन्ट्रोल रूम से ही होती है। बतौर बाड़मेर व्रताधिकारी वह पता करवाएंगे की सीसीटीवी कब से बन्द है।

हर साल मनाया जाता है विजय दिवस 

करगिल विजयी दिवस हो या फिर सन 1965 का बंग्लादेश युद्ध के विजयी दिवश का जश्न हर साल अपने रूबरू देखने वाले शहीद स्मारक के साथ जो हुआ वह असामाजिक तत्वों की बदनीयती को सभी के सामने रख गया लेकिन शहर की सुरक्षा के दावे और पुलिस के अपराधियों में डर और आम जन में विश्वास के मूल मंत्र की भी बखिया मामले ने उधेड़ कर रख दी है यह भी तय है।

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