राजस्थान पंचायतीराज सेवा परिषद की वाजिब मांगों का जिला सरपंच संघ ने दिया समर्थन

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बाड़मेर

राजस्थान पंचायतीराज सेवा परिषद के बैनर तले ग्राम विकास अधिकारी, पंचायत प्रसार अधिकारी एवं विकास अधिकारियों द्वारा 12 सितम्बर से पूर्व निर्धारित कार्यक्रम अनुसार सामूहिक अवकाश एवं कार्य बहिष्कार कर हर पंचायत समितियों व् जिला मुख्यालयों पर धरना पांचवे दिन भी जारी रहा जिस वजह से ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग की समस्त योजनायें व् कार्यक्रम ठप हो गये है फिर भी सरकार ग्रामीण विकास की अंतिम/कार्यकारी कड़ी की वाजिब/न्यायपूर्ण मांगों की कोई सुनवाई नहीं कर रही है यह प्रदेश का दुर्भाग्य है।

जनता व् जन प्रतिनिधियों में जबरदस्त आक्रोश

अब तक राज्य सरकार द्वारा पंचायतीराज को मजबूती देने के बजाय प्रयोगशाला बना रखा है जिसके चलते प्रदेश की ग्रामीण जनता व् जन प्रतिनिधियों में जबरदस्त आक्रोश है। सेवा परिषद के साथ सरकार द्वारा 9 बार इनकी मांगों पर सहमती बनी व् लिखित समझौते हुए फिर भी जब आदेश जारी करने का समय आता है तो अड़ंगे लगाकर कोई सकारात्मक कार्यवाही नहीं की जाकर सरासर वादा खिलाफी की जाती है।

लोकतान्त्रिक तरीके से चुनी गई सरकार से प्रदेश के विकास में सर्वाधिक भूमिका निभाने वाले कार्मिकों के साथ इस प्रकार के असहयोगपूर्ण रवैये की सरपंच संघ बाड़मेर निंदा करता है साथ ही मीडिया के जरिये सरकार से अपील करता है कि अगर 18 सितम्बर मंगलवार शाम तक सेवा परिषद के न्याय आधारित मांगपत्र के लिये चल रहे आन्दोलन को कुचलने के लिये तानाशाही तरीके से जारी हिटलरी आदेश संख्या 2784 दिनांक 15.09.2018 को तुरंत निरस्त कर पूर्व में हुए लिखित समझौतों को लागू करते हुए आवश्यक आदेश प्रसारित नहीं करती है तो बाड़मेर जिले के समस्त सरपंच अपनी अपनी ग्राम पंचायतों की तालेबंदी कर पंचायतीराज की मजबूती के लिये सेवा परिषद का साथ देने तथा आन्दोलन की रणनीति बनाने पर मजबूर होंगे जिसकी वजह से कार्यों में उत्पन्न होने वाले समस्त व्यवधानों के लिये केवल मुख्यमंत्री व् ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज मंत्री राजस्थान सरकार जिम्मेदार होंगे।

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