भीषण गर्मी से ट्रांसफार्मरों का भी चढ़ गया पारा 73 डिग्री, लगाने पड़े कूलर पंखे

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बाडमेर
सप्ताह भर से गर्मी की तपन ने इंसानों और मवेशियों को बेहाल कर रखा है लेकिन इस देह जला देने वाली तपिश ने मशीनों को भी अपनी चपेट में ले लिया है और यही वजह है कि अब मशीनों को भी ठंढक के लिए कूलर और पंखों की जरूरत पड़ गई है।

भीषण गर्मी मेे विद्युत ट्रांसफार्मरों का पारा भी उबाल पर आ गया है। पश्चिमी राजस्थान के बाड़मेर शहर के विद्युत सब स्टेशनों में लगे ट्रांसफार्मरों का पारा 73डिग्री सेल्सियस से ज्यादा पहुंच गया। इसे घटाने के लिए डिस्कॉम को सभी जगह कूलर लगाने पड़ रहे हैं।

बाड़मेर शहर में 33 केवी के 132 सब स्टेशन हैं और इनमें से  में पंखे-कूलर की संख्या बढ़ाई जा रही है। इससे इनके तापमान में 10 फीसदी तक कमी लाई गई है। निर्धारित से ज्यादा तापमान होने पर इन ट्रांसफार्मर के बस्ट होने का खतरा रहता है। साथ ही ट्रिपिंग बढ़ जाती है। ऐसे में इस बार बड़ी संख्या में ट्रांसफार्मर पर कूलर-पंखे लगाने पड़े हैं। पश्चिम राजस्थान के शहरों में तो सड़क किनारे लगे ट्रांसफार्मरों का तापमान कम करने के लिए कूलर लगाए गए हैं।

जानकारी के मुताबित 73 डिग्री तक रह सकता है तापमान इन ट्रांसफार्मरों का अधिकतम तापमान 73डिग्री तक निर्धारित है। इनमें ऑयल व वाइंडिंग तपमान मापन के लिए मीटर लगे हुए हैं। इनमें 73 डिग्री तक तापमान रिकॉर्ड किया गया है। कुछ सब स्टेशन पर तो पंखों को ट्रांसफार्मर के साथ इनबिल्ट कर दिया गया है। जैसे ही निर्धारित से ज्यादा तापमान हो जाता है, पंखे स्वत: चलते हैं।एक तरफ जहां 100 केवीए डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफार्मर 45 डिग्री तापमान तक बेहतर ढंग से काम करता है।

उससे अधिक गर्मी और ऑयल की तपन के बाद ट्रिपिंग व फेज टूटने की शिकायतें बढ़नेलगती हैं। बिजली खपत का लोड बढ़ने के कारण ऐसे ट्रांसफार्मर से निर्धारित से ज्यादा अधिक लोड का डिस्ट्रीब्यूशन किया जा रहा है। गर्मी में इंसान मवेशियों के हैरान परेशान होने की खबरों के बाद पश्चिमी राजस्थान में मशीनों के गर्मी की चपेट में आने से साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहाँ गर्मी अपने पूरे तांडव पर है। अब देखना यह है कि कुदरत इस गर्मी से कब इस इलाके को मानसून की बरखा से निजात दिलाती है।

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