पाकिस्तान का खात्मा होने में लगेंगे मात्र 3 मिनट : यादव

0
274

बाड़मेर।

सैनिक आपस में सगे भाई से भी बढ़कर रिश्ता रखते हैं, इसीलिए हमारे 44 जवानों के पुलवामा में शहीद होने के बदले में उसके मात्र बारहवें दिन 350 से ज्यादा आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया। हिंदुस्तान के सैनिक शेर है, शेरों को जगाओ मत, नही तो पाकिस्तान का खत्मा होने में मात्र तीन मिनट लगेंगे। यह जोशपूर्ण उद्गार परमवीर चक्र प्राप्त सूबेदार मेजर योगेंद्र सिंह यादव ने मंगलवार को बाड़मेर में कहे। वे यहां आदर्श स्टेडियम में थार के वीर: आओ करें सलाम कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि उद्बोधन दे रहे थे। करगिल विजय के हीरो यादव ने अपने भाषण की शुरुआत में कहा कि वह बाड़मेर की पुण्य धरा पर आकर स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। भारत की धरती हमारी माता है, और हमारे संस्कार हमारी मिट्टी से माता-पिता के माध्यम से शरीर में प्रवेश करते हैं। हिंदुस्तान हमारे दिलों में बसना चाहिए। राष्ट्र और राष्ट्रवासियों को प्रथम रखकर कार्य करें।

करगिल की यादें की ताजा

यादव ने कहा कि वे मात्र 16 वर्ष 5 माह की उम्र में ही 1988 में भारतीय सेना में भर्ती हुए और 18 ग्रेनेडियर्स में कश्मीर में तैनात हुआ। जब 1999 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी पड़ोसी पाकिस्तान से सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाने का प्रयास कर रहे थे तब पाकिस्तान के कुछ हुक्मरानान यह नहीं चाहते थे। उन्होंने पीठ पर छुरा घोंपते हुए हमारी चौकियों पर तब कब्जा जमाया जब हमारी सेना शिमला समझौते के तहत भारी बर्फबारी में मोर्चों से पीछे मैदानों में आई।

इस घटना के दौरान ही 5 मई को उनका विवाह हुआ और 22 मई को बटालियन पहुंचना पड़ा। इसके बाद हमने 22 दिन तक पहाड़ी पर दुर्गम लड़ाई लड़ी और 12 जून, 1999 को सफलता प्राप्त की। यहां की जीत के बाद जब हम वापस कैंप में पहुंचे तो द्रास में टाइगर हिल्स को दुश्मनो से मुक्त कराने का लक्ष्य मिला। इस पर 2 जुलाई को उन्होंने अपने लीडर के नेतृत्व में दल के साथ 16500 फीट ऊंचाई वाली 90 डिग्री चढ़ाई वाली पहाड़ी पर रस्सियों के सहारे चढ़ाई शुरू की। दो दुष्मन से बचकर तीसरी रात को वे पहाड़ी पर पहुंचने ही वाले थे कि एक पत्थर गिरने से दुश्मन सैनिकों ने दो तरफ से गोलीबारी शुरू कर दी, जवाबी फायरिंग में सभी दुश्मन सैनिकों को मार गिराया। यहां से सबने तय किया कि मरना तय ही है ऐसे में दुश्मन सैनिकों को मारकर ही मरना ठीक रहेगा। इसी लक्ष्य के साथ डट गए और भीषण गोलीबारी में हमारे सभी जवान वीर गति को प्राप्त कर गए। हमारे जवानों को उन्होंने मरा हुआ देखने के लिए फिर से गोलियों की बरसात की।

यादव ने बताया कि उनके शरीर में भी तीन गोलियां लगी, फिर भी इस भीषण हमले में वे भी चुपचाप पड़े रहे। एक बार फिर से दुश्मन सैनिक मरे हुए भारतीय सैनिकों पर गोलियां बरसाने लगा, इस बार एक गोली उन्हें भी सीने पर मारी, लेकिन जेब में रखे पर्स में सिक्के होने से यह गोली ज्यादा असर नहीं कर पाई। इसी दौरान एक सैनिक ने उनकी एके-47 उठाई, इस पर उसे उनके जिंदा होने का आभास हुआ। तभी उन्होंने अपने जेब में से एक ग्रेनेड निकाला और उस पाकिस्तानी सैनिक के कपड़ों में डाल दिया, कुछ ही सैकंड में उसका सिर फट गया। इससे अन्य पाकिस्तानी सैनिकों में हड़कंप मच गया, उन्हें लगा कि यह हमला पहाड़ी के नीचे से भारतीय सैनिकों ने किया है। इसी दौरान उन्होंने राइफल उठाई और वहां मौजूद सभी दुष्मन सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया।

इसके बाद उन्होंने रेंगते हुए वहां पर दुष्मन के सभी मूवमेंट को देखा और पहाड़ी भारतीय सेना के कैंप की ओर लुढ़क गया। तभी कुछ साथी सैनिकों ने उन्हें कमांडिंग ऑफिसर के पास पहुंचाया, जहां उन्होंने उन्हें दुश्मन की सभी जानकारी दी। इसके बाद वे बेहोश हो गए और जब होश आया तो वे श्रीनगर के आर्मी अस्पताल में थे और वहां जानकारी मिली कि हमने टाइगर हिल्स को दुश्मनों से मुक्त करा दिया है।

वर्दीधारी बनें युवा

इससे पहले कार्यक्रम की शुरुआत भारत माता के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं राष्ट्रगान से हुई। इसके बाद शहीदों के लिए दो मिनट का मौन रखा गया। इसके पश्चात् संरक्षक रावत त्रिभुवन सिंह ने स्वागत भाषण देते हुए बाड़मेर के शहीदों के बारे में जानकारी दी। सेना के मेजर जनरल एन.एस.राजपुरोहित ने बाड़मेर के युवाओं से वर्दीधारी बनने का आह्वान किया। आई.पी.एस. महेंद्र सिंह चौधरी ने कहा कि बाड़मेर के लोगों में देश सेवा के प्रति जोरदार जज्बा है। पुलिस अधीक्षक राशि डोगरा ने पुलिस महानिरीक्षक सचिन मित्तल के संदेश का वाचन किया।

क्रिकेटर रवींद्र जडेजा की बहिन समाजसेविका नैना जडेजा शहीदों को याद करते हुए भावुक हो उठीं। बीएसएफ के डीआईजी गुरपाल सिंह ने कहा कि बाड़मेर की सीमा पर तैनात बीएसएफ के जवान आमजन के लिए हर समय तत्पर है, जब भी जरूरत हो लोग बीएसएफ से मदद मांगें।

कार्यक्रम संयोजक रघुवीर सिंह तामलोर ने कार्यक्रम आयोजन के बारे में जानकारी दी। अध्यक्षता कर रहे कीर्ति चक्र प्राप्त बीएसएफ के डीआईजी नरेंद्रनाथ धर दूबे ने कहा कि 1988 में उनकी पहली पोस्टिंग बाड़मेर में हुई थी, यहां के लोगों का जवानों के प्रति प्रेम देखने योग्य है। जिला कलक्टर हिमांषु गुप्ता ने भी अपने विचार व्यक्त किए। अखिल भारतीय पूर्व सैनिक परिषद् के अध्यक्ष कैप्टन हीर सिंह भाटी ने आभार ज्ञापित किया। कार्यक्रम का मंच संचालन जफर खां सिंधी, हरीष जांगिड़ एवं जसवंत मायला ने किया।

प्रस्तुतियों ने भरा जोश 

कार्यक्रम में कॉलेज विद्यार्थी वरुण कुमार ने गीत, दिल्ली पब्लिक स्कूल के दल ने धुन वादन, तेजमाल सिंह ने कविता पाठ, देवेंद्र सिंह सोलंकी ने गीत ऐसा देष है मेरा, फकीरा खां भादरेष ने गीत चिट्ठी न कोई संदेष, दीप सिंह भाटी ने कविता पाठ, खेता खां-फकीरा खां-अनवर खां ने गीत केसरिया बालम, आदर्श विद्या मंदिर की बालिका देवांशी अरविंद तापडि़या ने कविता पाठ, सिपाही भोला प्रसाद ने गीत संदेश आते हैं तथा स्वरूप पंवार ने गीत ऐ मेरे वतन के लोगों की प्रस्तुति देकर माहौल को देशभक्ति से ओत-प्रोत बना दिया।

शहीद परिवारों एवं जवानों का हुआ सम्मान

कार्यक्रम में अशोक चक्र विजेता शहीद प्रताप चंद, महावीर चक्र विजेता जनरल हणूत सिंह, शौर्य चक्र विजेता चतर सिंह, शौर्य चक्र विजेता हनुमान राम, शौर्य चक्र विजेता धर्माराम, शहीद मूलाराम बिसारणिया, शहीद दुर्जन सिंह रेडाणा, पहाड़ सिंह बसरा, सिंगरन यादव, दीपाराम, नारणाराम नौसर, मोटाराम, धनसिंह, माधुसिंह थूंबली, बाघाराम, कुंपसिंह, मल्लसिंह, मोहन भारती, हेमाराम, उगम सिंह, गंगाराम, मगाराम, नारायण राम, देवाराम, मगाराम, बायतु पनजी, खेताराम उंडू, हेमसिंह, कुंभाराम, भीखाराम, मंगलसिंह, चुन्नीलाल, माधोसिंह आदि शहीदों के परिजन को स्मृति-चिह्न एवं शॉल ओढ़ाकर सम्मान किया गया। वहीं राष्ट्रपति पदक प्राप्त कंवराज सिंह गोरडि़या, बास्केटबॉल खिलाड़ी महिपाल सिंह, एषियाड रजत पदक विजेता घुड़सवार जितेंद्र सिंह, घुड़सवार गुलाब सिंह, मैराथन धावक खेताराम, सुमेरसिंह कानोड़, जितेंद्र सिंह राठौड़ आदि का भी सम्मान किया गया।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here