हादसे से सबक, गांव वालों ने लागू की शराबबंदी

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बाड़मेर।

राजस्थान के सीमावर्ती बाड़मेर जिले के एक गांव ने सड़क हादसे से सबक लेते हुए पूरे गांव में शराबबंदी लागू की है। शराबबंदी का फैसला लेने के बाद शराब का ठेका बंद करवाने के लिए पूरे गांव को अांदोलन भी करना पड़ा। 17 दिन तक गांव के बुढ़े-बच्चें, जवान और महिलाएं सभी धरने पर बैठे रहे और गुरूवार को उनकी जीत हुई, जब सरकार ने शराब ठेके का बंद कर दिया। गांव वालों का कहना है कि उनकी यह मुहिम यही तक ही नहीं रूकेगी, उनकी कोशिश रहेगी की पूरे इलाकें में शराबबंदी लागू हो।

मामला बाड़मेर जिले के धनाऊ पंचायत समिति के मिठड़ाऊ गांव का है। एक हजार परिवारों की आबादी और 95 फीसदी अनुसूचित जाति बाहुल्य का यह गांव बाड़मेर जिला मुख्यालय से करीब 100 किलोमीटर दूर भारत-पाक सीमा पर बसा है। बीती 9 जुलाई को गांव के तीन युवकों की एक सड़क हादसे में मौत हो गयी थी। तीनों युवक शराब के नशे एक मोटर साईकिल पर सवार होकर गांव लौट रहे थे, इस दौरान एक स्कूली बस से भिंडंत में एक युवक की मौके पर ही मौत हो गयी, जबकि बाकी दो जनों की उपचार के दौरान अस्पताल में मौत हो गयी।

शराब की बुरी लत के कारण गांव के तीन परिवारों के चिराग बुझ गए। हादसे के अगले दिन गांव में एक साथ उठी तीन अर्थियों ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया। इस हादसे के बाद गांव वालों ने महसुस किया कि गांव के अमूमन हर घर में कोई ना कोई शराब के नषें की लत का शिकार है।

सात दिन बाद 16 जुलाई को गांव के लोग एक जाजम पर इक्टठा हुए। इस दौरान गांव के 75 वर्षीय बुर्जुग अमोलखदास भांभू ने गांव वालों को शराब छोड़ने को कहा। भांभू ने कहा कि वो अपने गांव को इस तरह उजड़ता नहीं देख सकता है। उन्होनें कहा कि या तो गांव वाले शराब छोड़ दे, नहीं तो वो गांव छोड़ देगा। बुर्जग के इन शब्दों ने पूरे गांव का झकझोर कर रख दिया और सभी ने गांव में शराबबंदी लागू करने का निणर्य लिया। यह तय किया गया कि गांव में ना तो कोई शराब पिएगा और ना ही किसी को पिलाई जाएगी। पूरे गांव की मौजुदगी में शराब पीने वालें लोगों ने भविष्य में शराब ना पीने की कसम खाई।

इस फैसले के बाद गावं वालों ने शराब के ठेके का बंद कराने की मुहिम छेड़ी। अगले ही दिन 17 जुलाई को गांव वालें जिला कलेक्टर से मिले और गांव में शराबबंदी के उनके निणर्य के बारे में कलेक्टर को अवगत कराते हुए गांव में शराब के ठेके को बंद कराने की मांग की।

हालांकि गांव वालों को कलेक्टर से शराब का ठेका बंद करवाने का आश्वासन तो मिला, लेकिन गांव वालें अपनी जिद्द पर अड़े थे और ठेका बंद करवानें के लिए उन्होनें उसी दिन से ठेके के बाहर धरना शुरू कर दिया। 17 दिन तक गांव के बुढ़े-बच्चें, जवान और महिलाएं सभी धरने पर बैठे रहे और अंततः गुरूवार को उनकी जीत हुई, जब सरकार ने शराब ठेके का बंद कर दिया। गांव वालों ने अपनी इस जीत पर पंरपरागत तरीके से अनूठे आयोजन किया और पूरे गांव में मिश्री बांटी गयी।

बाड़मेर में आबकारी अधिकारी भवंरसिंह सारण ने बताया कि शराब का ठेका बंद होनें से गांव में सालाना 9 लाख रूपए की शराब की बिक्री होती थी। उन्होनेंं बताया कि गांव वालों के विरोध को देखते हुए गांव मेंं शराब के ठेके को बंद करवा दिया गया है।

गांव के लक्ष्मणराम कागा ने बताया कि पूरे गांव ने सामूहिक रूप से गांव में शराबबंदी का निणर्य लिया है। कागा ने बताया कि शराब के नषें ने गांव को बर्बाद कर दिया था। कई परिवार इस नषें की लत का षिकार होकर बर्बादी के कगार पर थे, खास तौर पर महिलाओं पर अत्याचार बढ़ रहे थे। कागा ने बताया कि जो लोग इस नषें की लत का षिकार है, चिकित्सकीय मदद से उनका उपचार करवाया जाएगा। कागा ने बताया कि उनकी यह मुहिम गावं तक नहीं रूकेगी।

उन्होनें बताया कि गांव के शराब के ठेके का बंद करवाने के बाद गांव वालों ने निणर्य लिया है कि आस-पास के गांवों के लोगों को भी इस बुरी आदत के बारें में जागरूक करेगें और कोषिश करेगें कि उनके गांव के तरह पूरे इलाकें में शराबबंदी लागू हो।

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