कृषि मण्डी प्रागण में पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी को दी श्रद्धांजलि

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बाडमेर।

कृषि उपज मण्डी समिति बाडमेर में शनिवार को पूर्व प्रधानमंत्री व भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी को समस्त व्यापार मण्डल एवम मजदूर यूनियन की ओर से श्रद्धांजलि दी गई। जिला अनाज व्यापार संघ के अध्यक्ष रमेश पारख ने बताया कि कृषि मण्डी प्रागंण में बाडमेर जिला अनाज व्यापार संघ,मण्डी व्यापार संघ व मण्डी विकास समिति द्वारा शनिवार को दोपहर 12 बजे श्रद्धांजलि सभा का आयोजन हुआ।

श्रंद्वाजलि सभा में सर्वप्रथम जिला अनाज व्यापार संघ के अध्यक्ष रमेश पारख,संरक्षक वीरचन्द वडेरा, मण्डी विकास समिति के अध्यक्ष बाबूलाल वडेरा,मण्डी व्यापार संघ के अध्यक्ष किशनलाल वडेरा द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी की तस्वीर के आगे पुष्प अर्पित कर 5 मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई। तत्पश्चात मण्डी व्यापारी कवि गौतम चमन द्वारा कविता, महानायकथा, मातृभूमि आराधकथा काव्य जंली की रचना पेश की, इसके बाद गौतम चमन ने कहा कि हिंदुस्तान की सियासत का एक महाकाव्य, तो किसी कविता के प्रवाह के मानिंद हैं अटल बिहारी वाजपेयी. हिंदुस्तानी सियासत पर एक अमिट दस्तखत, तो भारतीय राजनीति के उतार-चढ़ाव के बीच एक ठहराव भी. इस चेहरे में हिंदुस्तान की सियासत का कई दशकों का इतिहास सिमटा हुआ है. इस शख्सियत में आजाद भारत के राजनीतिक संघर्ष की गाथा समाहित है. जबांदानी के उस्ताद और वाक् चातुर्य और वाक सौंदर्य का रूपक, तो देश की राजनीति में एक कविता हैं अटल बिहारी वाजपेयी. उनकी  कविताओं के पीछे एक अतीत है. जब जनता पार्टी बनी और जब जनता पार्टी टूटी तब उन्होंने कविताएं लिखीं.उनकी कविताएं उनके व्यक्तित्व का आईना है. कविताओं की तहरीरों में अटल जी की भावनाएं हैं. आज जीवन के उस पड़ाव पर अटलजी हैं जहां वो महसूस कर सकते है।

संरक्षंक वीरचन्द वडेरा ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी जब प्रधानमंत्री बने तब से पुरे भारत में विकास की गंगा शुरू हुई एवम उनके व्यक्तित्व पर विचार व्यक्त किए।जिला अनाज व्यापार संघ के सचिव दिनेश भूतडा द्वारा परमाणु विस्फोटक में सहभागिता पर बात करते हुए जीवन पर प्रकाश डाला और कहा कि पोखरण में परमाणु परीक्षण के बाद प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा पोखरण में परमाणु परीक्षण के बाद दिया गया भाषण आज भी याद किया जाता है. देश को वैश्विक पटल पर एक अलग पहचान दिलाने के बाद वाजपेयी जी ने देश की संसद मे एक यादगार भाषण दिया था।

उन्होंने अपने भाषण में कहा था कि ये आश्चर्य है कि परमाणु परीक्षण की भी आलोचना की. पूछा गया कि देश के सामने कौन सा खतरा था. उन्होंने कहा कि मैंने 1974 में जब इंदिरा जी के नेतृत्व में परमाणु परीक्षण किया गया था तो हमने उसका स्वागत किया था. क्योंकि वह देश की रक्षा के लिए किया गया. उन्होंने कहा कि क्या रक्षा के मामले में हमें आत्मनिर्भर नहीं होना चाहिए. वाजपेयी जी ने यूरोप का उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि पोखरण टू अपनी संतुष्टि के लिए नहीं था. आर्थिक प्रतिबंध हमें आगे बढ़ने से नहीं रोक सके. रक्षा संबंधी फैसले करने से हमें नही विरथ नहीं कर सके. लेकिन परीक्षण के साथ हमनें यह भी ऐलान किया कि हम परमाणु हथियार का इस्तेमाल करने में हम पहले पहल नहीं करेंगे. हमनें यह भी कहा जिनके बाद यह हथियार नहीं हैं हम उनके खिलाफ इसका इस्तेमाल नहीं करेंगे।कैलाश कोटडिया द्वारा वाजपेयी की देश के प्रति लगाव एवम राष्ट्र प्रेम की खान बताया इन्होने देश के लिए बहुत कुछा दिया जो अपने पास आज भी जीवित है।

इस सभा के दौरान मिश्रीमल मालू, पूनमचन्द खोरवाल,संजय बोथरा सहित किशनलाल वडेरा,रतनलाल बोहरा ने भी अपने विचार व्यक्त किए।इस अवसर पर हंसराज कोटडिया, सम्पतराज बारदाना, पुखराज भंसाली, गौतम बोथरा, हंसराज संखलेचा, रमेश संखलेचा, मदनलाल बोथरा, पुखराज म्याजलार, लूणकरण गोलेच्छा, धनराज मालू, अरविन्द संखलेचा, पारसमल भंसाली, कन्यालाल अरटी, व सैकडो संख्या में कृषि मण्डी के व्यापारी एवम मजदूर मौजूद रहे।

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