गहलोत की तरह संवेदनशीलता दिखाए मोदी- जोशी

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बाड़मेर

यह सीमावर्ती बाड़मेर जिले की गर्मी और जून का माह, जिला मुख्यालय से सीमावर्ती इलाका करीब 100 किलोमीटर से भी ज्यादा दूर है जहां पर पानी की बूंद दूर-दूर तक दिखाई कम ही पड़ती है। वहां पर गायों के लिए ग्रामीणों का अपने स्तर पर चारे की व्यवस्था कर पाना मुश्किल ही होता है। इधर केंद्र की मोदी सरकार की उपेक्षा भरी नीतियों की वजह से यह गोवंश मौत का शिकार होता जा रहा था। इस सूखे कि मार झेल रहे बोर्डर इलाके के बाड़मेर जैसलमेर जिले की गायों को बचाने के लिए राज्य की अशोक गहलोत सरकार ने गायों को बचाने के लिए इन जिलों को विशेष पैकेज देने की घोषणा की है। गहलोत ने इन जिलों के प्रति अपना अपनत्व दिखाया और संवेदनशीलता का परिचय दिया है।

जिला कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता यज्ञदत्त जोशी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर मांग की है कि एनडीए सरकार गायों के प्रति संवेदनशीलता का परिचय देते हुए राष्ट्रीय आपदा राहत निधि के नियमो में संशोधन करें। थार कि गायों को बड़े किसान और छोटे, सीमांत किसानों में नहीं बांटे।

उन्होंने लिखा है कि सूखा ग्रस्त क्षेत्र में जब चारा पानी उपलब्ध ही नहीं है तो गायों को संभालना किसी भी किसान पशुपालक के लिए संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि थार कि जमीन अनुपजाऊ है और 15-15 बीघा जमीन अधिकतर परिवार के लिए सामान्य बात है। ऐसे में केंद्र सरकार के नियमो के चलते गाय बच नहीं सकती। केंद्र सरकार गायों की हत्यारिन सरकार है। मोदी गहलोत की तरह संवेदनशीलता दिखाएं।

जोशी ने लिखा है जब भी केंद्र में एनडीए की सरकार आई, राजस्थान के साथ राहत कार्य में सौतेला व्यवहार किया। गहलोत ने अपने पूर्व कार्यकाल में भी एनडीए कि सरकार के सौतेले व्यवहार के बावजूद राहत कार्य में कोई कमी नहीं आने दी।

गहलोत को बताया संवेदनशील मुख्यमंत्री

जोशी ने गहलोत को धन्यवाद पत्र लिखते हुए उन्हें अत्यंत संवेदनशील मुख्यमंत्री और नेता बताया। उन्होंने लिखा कि किसानों और पशुपालकों की समस्या समझते हुए तीस करोड़ का विशेष पैकेज की घोषणा आजादी के बाद की पहला और महत्वपूर्ण निर्णय है और किसान पशुपालक आभारी है।
जोशी ने कहा है कि केंद्र सरकार राष्ट्रीय आपदा राहत निधि कोष के नियमों में संशोधन नहीं करती है तो जिले में जन आंदोलन को खड़ा किया जाएगा।

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