अब सरकार सड़क सुरक्षा को बनाएगी जन आन्दोलन 

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जयपुर।
प्रदेशभर में सड़क सुरक्षा की बात अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे इसके लिए वर्ष 2017 को जनजागृति वर्ष मानते हुए हर 15 दिन में प्रदेश के किसी न किसी जिले में सड़क सुरक्षा पर बड़ा जनजागृति कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। सार्वजनिक निर्माण एवं परिवहन मंत्री यूनुस खान ने सड़क सुरक्षा से जुडे़ सभी विभागों, एन.जी.ओ, मीडिया और जनसामान्य का राज्य में हर गांव-कस्बे, जिले में सड़क सुरक्षा को एक जनआन्दोलन का रूप देने हेतु काम करने के लिए आह्वान किया है।

खान बुधवार को यहां दुर्गापुरा स्थित कृषि प्रबन्धन संस्थान के सभागार में ‘सड़क सुरक्षा-समय पहल का’ विषयक एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला में प्रदेशभर से आए सड़क सुरक्षा से जुडे़ लोगोें को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं को रोकने में सड़क इंजीनियरिंग, समुचित नियम-कानूनों का निर्माण सहायक तो है लेकिन धरातल पर सड़क दुर्घटनाओंं में प्रभावी कमी केवल जनजागरूकता से ही लाई जा सकती है। उन्होंने परिवहन विभाग के अधिकारियों को 31 दिसम्बर 2017 तक का कलेण्डर बनाकर दुर्घटनाओं की स्थिति के हिसाब से जिलों को वरीयता देते हुए हर 15 दिन में किसी न किसी जिले में सड़क सुरक्षा कार्यक्रम आयोजन के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन आयोजनो के लिए सभी हितधारक विभागाें के अधिकारी साथ जुटें, जनप्रतिनिधियों को साथ लिया जाए और जिले के सभी स्कूलों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए। इन कार्यक्रमों में सर्वेजनिक निर्माण मंत्री के मुख्य अभियंताओं समेत हितधारक विभागों के उच्चाधिकारी शामिल हों। इस क्षेत्र में अग्रणी एन.जी.ओ. के अनुभव का लाभ लेने के साथ ही परिवहन विभाग के प्रयासों से गठित 60 एन.जी.ओ को भी इन कार्यक्रमों में निश्चित भागीदारी सौंपी जाए। खान ने कहा कि भीड़ वाले स्थान जैसे चौखटी, स्कूल, सब्जीमण्डी जैसी जगहों पर होर्डिंग आदि लगाकर सड़क सुरक्षा का प्रचार किया जाना चाहिए। उन्होंने सभी अधिकारियों को अपने चेम्बर और कार्यस्थल पर सड़क सुरक्षा से सम्बन्धित कम से कम एक स्लोगन लगाने को कहा। इस अवसर सानिवि मंत्री खान ने सभी उपस्थितोंं को सड़क सुरक्षा शपथ भी दिलाई। जयपुर शहर के महापौर अशोक लाहोटी ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना सरकार के साथ हर सड़क उपयोगकर्ता की सामूहिक जिम्मेदारी है। श्री लाहोटी ने कहा कि स्कूल और कॉलेजों में सड़क सुरक्षा के अधिक से अधिक प्रजेन्टेशन आयोजित किए जाने चाहिए ताकि व्यक्तित्व विकास की प्रारम्भिक उम्र में ही सरल शब्दों में व्यक्ति को सड़क सुरक्षा की जानकारी मिल जाए। अतिरिक्त प्रमुख शासन सचिव डी.बी.गुप्ता ने सड़क इंजीनियरिंग में सुधार, ब्लैक स्पॉट के चिन्हीकरण एवं इसके लिए समर्पित कोष एवं गुड सेमेरिटन को बढावा दिए जाने की आवश्यकता बताई। परिवहन विभाग के आयुक्त एवं प्रमुख शासन सचिव शैलेन्द्र अग्रवाल ने विभागीय प्रयासों की जानकारी देते हुए कहा कि अब सड़क दुर्घटनाओें में कमी के लिए नई तकनीकोें के उपयोग, नए तौर तरीकों को अपनाने की आवश्यकता है। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक यातायात बी.एल.सोनी ने राज्य में सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़े प्रस्तुत करते हुए इस दिशा में साझा प्रयास किए जाने की आवश्यकता बताई। मोर्थ के मुख्य अभियंता सड़क सुरक्षा रवि प्रसाद सड़क सुरक्षा को मनोविज्ञान से जुड़ा विषय बताते हुए ब्लैक स्पॉट्स सुधार विषयक प्रस्तुतीकरण दिया। अन्य तकनीकी सत्रों में मोर्थ के तकनीकी सलाहकार वीरेन्द्र सिंह, सड़क सुरक्षा प्रकोष्ठ प्रभारी उपायुक्त परिवहन श्रीमती निधि सिंह, सानिवि के मुख्य अभियंता पीएमजीएसवाई सी.एल.वर्मा, सेंटर फोर रोड सेफ्टी की कॉर्डिनेटर श्रीमती प्रेरणा सिंह, जेपीआरआई के रोहन गोवद्र्धन ने प्रस्तुतीकरण दिए। एएसआरटीयू की श्रीमती तामली गांगुली ने एन.जी.ओ के पैनल डिस्कशन एवं इंटरेक्टिव सैशन का संचालन किया। कार्यशाला में आरएसआरटीसी के प्रबन्ध निदेशक राजेश यादव, आपदा प्रबन्धन विभाग के शासन सचिव रोहित कुमार, मुख्य अभियंता सानिवि शिवलहरी शर्मा, अपर परिवहन आयुक्त श्रीमती मनीषा अरोड़ा, विभिन्न हितधारक विभागाें के प्रतिनिधि, एन.जी.ओ. प्रतिनिधि और प्रदेशभर से आए सड़क सुरक्षा से सम्बन्घित व्यक्ति एवं जनसामान्य उपस्थित थे।

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