रिश्वत लेते धरे गए चौकी प्रभारी

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झुंझुनूं। खेतड़ी थाने में आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में दर्ज कराए मामले से आरोपी को बाहर निकालने के लिए बबाई चौकी में सौदेबाजी की गई। बबाई चौकी के कांस्टेबल ने आरोपी को मंगलवार को पैसे लेकर बुलाया। आरोपी ने एएसआई और कांस्टेबल को रुपए दिए। इस दौरान सीकर एसीबी ने मौके से दोनों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।
यह था मामला
मई माह में एक युवक के जहर खाकर जान देने के बाद उसके परिजनों ने आत्महत्या के लिए उकसाने का नामजद मामला दर्ज कराया था। उन्होंने रिपोर्ट में कहा कि कुछ लोग मौत का शिकार बने युवक से रुपए मांगते थे। इस पर उसने दबाव में आकर आत्महत्या कर ली। पुलिस ने 306 में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी। मामले की जांच के दौरान मुख्य आरोपी अजीतसिंह से बबाई चौकी के एक हेड कांस्टेबल ने पूछताछ शुरू की। उस वक्त एक कांस्टेबल आया और उससे मामले को रफा दफा करने के लिए एक लाख रुपए मांगे। साथ ही सभी आरोपियों को मामले से निकालने के लिए भी हां भरी। अजीतसिंह ने उसे उस वक्त 10 हजार रुपए दे दिए, लेकिन अजीतसिंह के परिवार में कोई काम होने से वह जांच को आगे नहीं बढ़वा पाया। इसके बाद जिस हेड कांस्टेबल के पास जांच थी। उसका तबादला हो गया और एएसआई अभयसिंह को बबाई चौकी का प्रभारी बना दिया गया। एएसआई ने आकर जब मामले की जांच शुरू की तो उसने भी आरोपी अजीत को बुलाया और डराया धमकाया। एएसआई अभयसिंह ने जांच के लिए कांस्टेबल उपेंद्र को कहा और उपेंद्र ने भी अजीत के साथ लेन देन की बात की। उपेंद्र ने 30 हजार रुपए अकेले अजीत को मामले से निकालने के नाम पर मांगे। इसके बाद 20 हजार रुपए में सौदा तय हुआ। इसकी शिकायत लेकर एक बार फिर अजीत सीकर एसीबी के पास पहुंच गया। सोमवार एसीबी ने शिकायत का सत्यापन करवाया और सत्यापन के दौरान ही अजीत सिंह ने पांच हजार रुपए एएसआई और कांस्टेबल को दे दिए। बाद में एएसआई और कांस्टेबल ने अजीत को बाकी के 15 हजार रुपए लेकर मंगलवार को आने को कहा। मंगलवार को चौकी में रिश्वत की राशि लेते एएसआई और कांस्टेबल पकड़े गए। यह कार्रवाई सीकर एसीबी के सीआई हजारीलाल खटाणा के नेतृत्व में की गई। इस मामले में पूर्व में जांच कर रहे और पैसे लेने वाले एक हेड कांस्टेबल मुलायम तथा कांस्टेबल सरदारसिंह को भी जांच के दायरे में रखा गया है।

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